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Tuesday, March 11, 2014

यूँ ही...

बेवजह चाँद को देखकर दिल की बातें कह जाना..
प्यार जताने का ये भी इक तरीका है ।

गुमसुम खड़े होकर आसमान को तकना..
किसी के इंतज़ार का ये भी इक सलीका है ।

आईने झूठ नहीं बोलते, ज़रा ध्यान से देखो..
तुम्हारी मुस्कराहट का रंग आज ज़रा फ़ीका है ।

तस्वीर के अन्दर से झांकती तुम्हारी आँखें..
बताओ, क़त्ल करने का ये कौन-सा तरीका है ।

4 comments:

  1. अधरी सी रात है अधुरा सा ये ख़याल तुम्हारा
    बेहद चलत में है पर क्या शिद्दत से ये लिखा है...

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  2. चाँद को देखता हूँ तो तुम्हारा चेहरा दिखता है,
    तुमसे बातें करने का मैंने अब यही तरीका सीखा है |

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  3. सदके आँचल के एजाज़े सुखन
    कुछ तो बदला सा है अंदाज
    कुछ और लिखा कुछ और कहा
    कुछ और गज़ल ये बोले है .....:)

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  4. वाह ! बढ़िया !

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