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Tuesday, February 4, 2014

राजू चाचा...

राजू चाचा नहीं रहे । काश, ये ख़बर सच नहीं होती.. घर पे सुबह से दो बार फ़ोन किया, लेकिन माँ-पापा में से किसी ने नहीं बताया । दोनों बार नार्मल बात हुई। बाद में माँ ने फ़ोन कर के बतलाया.. कहने लगी सुबह तुमलोगों को टेंशन हो जाता, पूजा करनी थी..इसलिए नहीं बताया ।
क्यूँ चला जाता है कोई दूर... कहाँ चला जाता है ! सबका जाना ज़रूरी होता है क्या ! सब यहीं नहीं रह सकते.. बीमार ही सही, कम-से-कम आँखों के सामने तो रहे.. ज़िंदा रहें ।

"राजू चाचा" - कहने को तो हमारे किरायेदार, लेकिन थे घर के सदस्य। पहले होटल चलाते थे, बाद में फोटो-लेमिनेशन का काम करने लगे। मीट-भात के शौक़ीन और दारु के बिना कोई शाम नहीं । लेकिन हमारे घर में राजू चाचा मेरे पापा के छोटे भाई की तरह ही आते-जाते रहे ।घर में छोटा से छोटा काम हो, कोई पूजा हो, कोई फंक्शन हो.. राजू चाचा का होना सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता था । या तो उस रोज़ दुकान बंद करते थे या फिर किसी और के हवाले कर, इधर का सारा काम देखते । शादी अभी तक की नहीं थी। हम हमेशा कहते, "आपके सामने पैदा हुआ पूरा मोहल्ला-टोला के बच्चा का शादी हो रहा है और आप अभी तक कुंवारे है।" (हमारे यहाँ की भाषा में लिख रही हूँ)
लूडो में हार जाने पर खिसिया के हम ही लोग पर बेईमान - बेईमानी का आरोप लगाके खुद खिसक लेते थे । और हमलोग भी उनके साथ लूडो इसलिए खेलते थे, क्यूंकि उनको हराने में मज़ा आता था ।
मेरे नॉन-वेज खाना छोड़ देने के बाद से हमेशा कहते रहे, "तुम खाएगी ! बोलो तो सही, हम एकदम ए-ग्रेड का बनाके खिलाएंगे"
एक और बात, कहने को तो खुद को अनपढ़ कहते थे, लेकिन अखबार रोज़ पढ़ते थे और लिखना कुछ नहीं आता था। इस हैरत वाली बात के लिए हमलोग हमेशा पूछते, तो पता चला कि अखबार देखते-देखते, अक्षर पहचान में आये और धीरे-धीरे पढ़ना आ गया । अब जाकर कुछ-कुछ लिखना सीख गए थे, हालांकि हिसाब करना अच्छे से आता था..लेकिन जब मैं वहाँ रहती थी तो एक बार क्रॉस-चेकिंग मुझसे ज़रूर करवाते थे ।और  जब मेरा आर्टिकल मैगज़ीन में छपा था, तब आराम से लेकर पढ़ा था और बहुत खुश हुए थे ।

जब से लेमिनेशन का काम शुरू किया, मेरे सारे फोटो उन्होंने ही लैमिनेट किये... ३-४ मेरे पसंदीदा फोटो,जो मैंने अपने ससुराल ले जाने के लिए रखा है.. उसके लिए तय था कि वो उसी वक़्त लैमिनेट होंगे।

...अब वो सारे फ़ोटोज़ कौन लैमिनेट करेगा, राजू चाचा.. अब जब घर जाउंगी तो कौन दुकान पर से आएगा 'हाँ बेटा' बोलते हुए... आप तो कहते थे, कि मेरी शादी में सारा काम करेंगे.. अब कौन मेरी शादी में काम करेगा !!!

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1 comment:

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, माँ सरस्वती पूजा हार्दिक मंगलकामनाएँ !

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